hindiI poem
दूर क्षितिज पर हरी लहरें, शांत हवा मैदान को छूती है। ऊंची घास, नए अंकुरित चावल के पौधे, प्रकृति ईश्वर का राग गाती है। एक आदमी नीचे बैठा है, हल्के कपड़े पहनें, सिर पर टोपी रखें। चुपचाप अपने सामने की सुन्दरता को देखो, वह प्रकृति के पूजक प्रतीत होते हैं। हरे मैदान में लिखा अरबी शब्द, "अल्लाह" प्रकृति की अपनी कविता की तरह है। उपजाऊ मिट्टी के बीच आध्यात्मिकता का स्पर्श, विश्वास और सौंदर्य में मिलन का मधुर जादू। एक पीला फल, प्रकृति की फसल, किनारे पर गिरा। उर्वरता के मूक प्रतीक की तरह। सूरज की रोशनी हरी ढलानों को छूती है, ऐसा लगता है कि शांति का संदेश चारों ओर फैल रहा है। यह चित्र मौन भाषा में कहता है, ईश्वर की रचना भी गहराई से मेल खा सकती है। प्रकृति की गोद में छिपा एक सत्य, अल्लाह सर्वत्र है, उसकी रचना मधुर है। किसान के मन में राहत की एक धारा उठती है, या यात्री को एक अजीब सी खुशी मिलती है। आस्था और प्रकृति के मिलन में, यह किसी स्वर्गीय कविता की खोज करने जै...